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बँटवारे के बाद पाकिस्तान से लाकर दतिया में स्थापित की गई थी हर वर्ष मनाया जाता है ज्योति स्नान समारोह, दर्शन को आते हैं लाखों श्रद्धालु

दतिया (मप्र) में बने सन्त हजारी राम मन्दिर में स्थापित पवित्र अखण्ड ज्योति सिन्धी समाज की आस्था व विश्वास का प्रतीक है। सन् 1947 में भारत-पाक के बँटवारे के बाद पाकिस्तान से दतिया पहुँची अखण्ड ज्योति सबसे पहले बैंक घर की हवेली में स्थापित की गई। 5 वर्षो तक यहाँ पूजा व सेवा के बाद पाकिस्तान से दतिया पहुँचे सिन्धी समाज के लोगों ने सामूहिक चन्दा कर गाड़ी खाना में ़जमीन ख़्ारीदी और सन् 1952 में सन्त ह़जारी राम मन्दिर का निर्माण कराया। मन्दिर निर्माण के साथ ही यहाँ अखण्ड ज्योति की स्थापना की गई, तभी से अखण्ड ज्योति यहाँ प्रज्जवलित है। मन्दिर निर्माण के बाद सिन्धी समाज के लोगों ने ज्योति स्नान पर्व की शुरुआत की। देश के एक मात्र सन्त हजारी राम मन्दिर में प्रज्जवलित अखण्ड ज्योति के दर्शन को हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालु यहाँ न केवल मनौती माँगते हैं, बल्कि मुराद पूरी होने पर मन्दिर में धार्मिक आयोजन व दान धर्म भी करते हैं। सावन माह में चन्द्रदर्शन के अनुसार मनाए जाने वाले 3 दिवसीय ज्योति स्नान पर्व में बुन्देलखण्ड के आस-पास के क्षेत्रों के अलावा देश विदेश से सिन्धी समाज के लोग शामिल होने आते हैं। 3 दिवसीय ज्योति स्नान कार्यक्रम में वर्षो से सिन्धी समाज के साधु-सन्त सम्मिलित होते चले आ रहे हैं। इनमें पाकिस्तान से साई साधुराम साहिब, लखनऊ से साई चान्दूराम साहिब, रायपुर से साई युधिष्ठर लाल, जलगाँव (महाराष्ट्र) से साई बाबा गेलाराम, कल्याण (मुम्बई) से साई बसन्त शाह दरबार, गोधरा (गुजरात) से बालरूप साई सहित छत्तीसगढ़ के भाटापारा व विलासपुर आदि शहरों से समय- समय पर साधु सन्तों ने आकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। 3 दिवसीय अखण्ड ज्योति स्नान पर्व की शुरुआत दतिया में बाइक रैली निकालकर की जाती है। दूसरे दिन सन्त हजारी राम मन्दिर से अखण्ड ज्योति यात्रा प्रारम्भ होकर शहर के प्रमुख मार्गो से होती हुई करन सागर पहुँचती है। यहाँ सन्तों की उपस्थिति में श्रद्धालु ज्योति स्नान, अरदास, सत्संग आदि कर ज्योति को मन्दिर वापिस लाते हैं। रास्ते भर ज्योति रथ पर श्रद्धालुओं द्वारा फूलों की वर्षा की जाती है। ज्योति स्नान को लेकर दतिया में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए झाँसी रेल मण्डल द्वारा दतिया स्टेशन पर कई सुपरफास्ट ट्रेन को अस्थाई ठहराव दिया जाता है।

 

बंकर की हवेली नाम से जाना जाता है

 

 

देश में एकमात्र दतिया में सन्त हजारी राम मन्दिर में स्थापित अखण्ड ज्योति का इतिहास पुराना है। मान्यता के अनुसार लगभग … सालों से प्रज्जवलित अखण्ड ज्योति देश- विदेश में निवास कर रहे सिन्धी समाज के लोगों की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। सिन्धु जनरल पंचायत दतिया अध्यक्ष लक्षमण सहवानी ने बताया कि सन् 1947 में भारत-पाक के बँटवारे के दौरान पाकिस्तान में बने एक मन्दिर के पुजारी प्रभुदास दतिया निवासी स्व. गिरधारी लाल रतनाणी के साथ मिलकर अखण्ड ज्योति को दतिया शहर लेकर आए। पाकिस्तान से लाकर पर्याप्त जगह न मिलने के कारण इसे बैंक घर की हवेली (वर्तमान में बंकर की हवेली) के नाम से पुकारा गया। 5 वर्षो बाद पाकिस्तान से आए सिन्धी समाज के लोगों ने मिलकर मन्दिर निर्माण के बाद वहाँ अखण्ड ज्योति स्थापित करायी। स्थापना के बाद से ही लोगों ने ज्योति स्नान पर्व को छोटे रूप में मनाना शुरू किया, लेकिन वर्ष 1963 के बाद इस समारोह को भव्यता मिली और देश- विदेश से श्रद्धालु महोत्सव में शामिल होने के लिए आने लगे।

बँटवारे के बाद पाकिस्तान से लाकर दतिया में स्थापित की गई थी

– हर वर्ष मनाया जाता है ज्योति स्नान समारोह, दर्शन को आते हैं लाखों श्रद्धालु

दतिया (मप्र) में बने सन्त हजारी राम मन्दिर में स्थापित पवित्र अखण्ड ज्योति सिन्धी समाज की आस्था व विश्वास का प्रतीक है। सन् 1947 में भारत-पाक के बँटवारे के बाद पाकिस्तान से दतिया पहुँची अखण्ड ज्योति सबसे पहले बैंक घर की हवेली में स्थापित की गई। 5 वर्षो तक यहाँ पूजा व सेवा के बाद पाकिस्तान से दतिया पहुँचे सिन्धी समाज के लोगों ने सामूहिक चन्दा कर गाड़ी खाना में ़जमीन ख़्ारीदी और सन् 1952 में सन्त ह़जारी राम मन्दिर का निर्माण कराया। मन्दिर निर्माण के साथ ही यहाँ अखण्ड ज्योति की स्थापना की गई, तभी से अखण्ड ज्योति यहाँ प्रज्जवलित है। मन्दिर निर्माण के बाद सिन्धी समाज के लोगों ने ज्योति स्नान पर्व की शुरुआत की। देश के एक मात्र सन्त हजारी राम मन्दिर में प्रज्जवलित अखण्ड ज्योति के दर्शन को हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालु यहाँ न केवल मनौती माँगते हैं, बल्कि मुराद पूरी होने पर मन्दिर में धार्मिक आयोजन व दान धर्म भी करते हैं। सावन माह में चन्द्रदर्शन के अनुसार मनाए जाने वाले 3 दिवसीय ज्योति स्नान पर्व में बुन्देलखण्ड के आस-पास के क्षेत्रों के अलावा देश विदेश से सिन्धी समाज के लोग शामिल होने आते हैं। 3 दिवसीय ज्योति स्नान कार्यक्रम में वर्षो से सिन्धी समाज के साधु-सन्त सम्मिलित होते चले आ रहे हैं। इनमें पाकिस्तान से साई साधुराम साहिब, लखनऊ से साई चान्दूराम साहिब, रायपुर से साई युधिष्ठर लाल, जलगाँव (महाराष्ट्र) से साई बाबा गेलाराम, कल्याण (मुम्बई) से साई बसन्त शाह दरबार, गोधरा (गुजरात) से बालरूप साई सहित छत्तीसगढ़ के भाटापारा व विलासपुर आदि शहरों से समय- समय पर साधु सन्तों ने आकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। 3 दिवसीय अखण्ड ज्योति स्नान पर्व की शुरुआत दतिया में बाइक रैली निकालकर की जाती है। दूसरे दिन सन्त हजारी राम मन्दिर से अखण्ड ज्योति यात्रा प्रारम्भ होकर शहर के प्रमुख मार्गो से होती हुई करन सागर पहुँचती है। यहाँ सन्तों की उपस्थिति में श्रद्धालु ज्योति स्नान, अरदास, सत्संग आदि कर ज्योति को मन्दिर वापिस लाते हैं। रास्ते भर ज्योति रथ पर श्रद्धालुओं द्वारा फूलों की वर्षा की जाती है। ज्योति स्नान को लेकर दतिया में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए झाँसी रेल मण्डल द्वारा दतिया स्टेशन पर कई सुपरफास्ट ट्रेन को अस्थाई ठहराव दिया जाता है।

बंकर की हवेली नाम से जाना जाता है

देश में एकमात्र दतिया में सन्त हजारी राम मन्दिर में स्थापित अखण्ड ज्योति का इतिहास पुराना है। मान्यता के अनुसार लगभग … सालों से प्रज्जवलित अखण्ड ज्योति देश- विदेश में निवास कर रहे सिन्धी समाज के लोगों की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। सिन्धु जनरल पंचायत दतिया अध्यक्ष लक्षमण सहवानी ने बताया कि सन् 1947 में भारत-पाक के बँटवारे के दौरान पाकिस्तान में बने एक मन्दिर के पुजारी प्रभुदास दतिया निवासी स्व. गिरधारी लाल रतनाणी के साथ मिलकर अखण्ड ज्योति को दतिया शहर लेकर आए। पाकिस्तान से लाकर पर्याप्त जगह न मिलने के कारण इसे बैंक घर की हवेली (वर्तमान में बंकर की हवेली) के नाम से पुकारा गया। 5 वर्षो बाद पाकिस्तान से आए सिन्धी समाज के लोगों ने मिलकर मन्दिर निर्माण के बाद वहाँ अखण्ड ज्योति स्थापित करायी। स्थापना के बाद से ही लोगों ने ज्योति स्नान पर्व को छोटे रूप में मनाना शुरू किया, लेकिन वर्ष 1963 के बाद इस समारोह को भव्यता मिली और देश- विदेश से श्रद्धालु महोत्सव में शामिल होने के लिए आने लगे।